एजुकेशन लोन: परदेस में पढ़ाई का रास्ता

स्नातक या स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की पढ़ाई के लिए सात समंदर का रुख करना अब दूर की कौड़ी नहीं रह गया है। इसका श्रेय जाता है एजुकेशन लोन को। कॉलेज में दाखिला सुनिश्चित होने के बाद अपने एडमिशन कार्ड , मार्कशीट और बैंक स्टेटमेंट एवं आवश्यक सिक्युरिटी (यदि कोई चीज गिरवी रखी गई है तो) की फोटोकॉपी के साथ लोन के आवेदन से जुड़ा कार्ड जमा कराइए और अपने पड़ोस के बैंक से लोन ले लीजिए।
गिरवी रखने की जरूरत
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य महाप्रबंधक (पर्सनल बैंकिंग) पी। नंदकुमारन ने कहा , ' आम तौर पर विदेश में पढ़ाई का लोन 7।5 लाख रुपए से ज्यादा का होता है इसलिए छात्र को कुछ न कुछ गिरवी रखना होता है। अलग-अलग मामलों में इसमें थर्ड पार्टी की गारंटी भी मदद देती है। ' बैंक 4 लाख रुपए तक लोन के लिए कोई संपत्ति बंधक रखने के लिए नहीं कहते। 7।5 लाख रुपए तक के लोन के लिए आप थर्ड पार्टी की गारंटी से काम चला सकते हैं। गिरवी रखने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट , राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र या यहां तक कि लोन की रकम के बराबर की संपत्ति का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। बैंक सिक्युरिटी के तौर पर रकम के बराबर की बीमा पॉलिसी की मांग भी कर सकते हैं। छात्र की मृत्यु होने की सूरत में इससे लोन की रकम जुटाई जा सकती है।
लोन का ब्योरा
बैंक जो शिक्षा लोन देते हैं , वे इंडियन बैंक्स असोसिएशन की मॉडल एजुकेशन लोन स्कीम पर आधारित होते हैं जिसकी शुरुआत 2001 में हुई थी। इस स्कीम के तहत लोन की रकम , कोई चीज गिरवी रखने , ब्याज दर , माजिर्न का पैसा और लोन के भुगतान से जुड़े कई नियम-कायदों का जिक्र किया गया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया , आंध्र बैंक , बैंक ऑफ इंडिया जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस सेगमेंट के सक्रिय खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। हालांकि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि शिक्षा लोन के लिए आप किस बैंक का दामन थामते हैं क्योंकि ब्याज दरों में मामूली अंतर है। लेकिन यदि आप इनमें से किसी बैंक से पहले से जुड़े हैं तो आपको कुछ फायदा रहता है। विदेश में शिक्षा के लोन के लिए आपको 15 फीसदी मार्जिन राशि अपनी जेब से चुकानी होगी। उदाहरण के लिए , यदि पाठ्यक्रम का कुल खर्च 15 लाख रुपए है तो बैंक आपको 12।75 लाख रुपए का लोन देगा। 2.25 लाख रुपए की शेष राशि आपको अपने संसाधनों से जुटानी होगी। लोन चुकाने की मियाद 5 से 7 साल के बीच होती है और यह भुगतान पाठ्यक्रम खत्म होने के एक साल बाद या फिर नौकरी लगने के 6 महीने बाद (जो पहले हो) शुरू होता है।
बीमा कवर का रखें ख्याल
कुछ ऐसे विदेशी विश्वविद्यालय हैं जो छात्रों के पास बीमा पॉलिसी को अनिवार्य बनाते हैं। कुछ कैम्पस में कवर का विकल्प चुनने पर जोर देते हैं तो दूसरे संस्थान अपनी पसंद के बीमा कवर के चुनाव की छूट देते हैं। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड , न्यू इंडिया एश्योरेंस , बजाज एलांयज , टाटा एआईजी और रिलायंस जनरल इंश्योरेंस जैसे बीमा कंपनियां इस तरह का कवर उपलब्ध कराती हैं। इन पॉलिसी में 5,00,000 डॉलर तक के चिकित्सा खर्च कवर होते हैं। इसके अलावा दुर्घटना , सामान खोने , व्यक्तिगत देनदारी और मेडिकल इमरजेंसी के मामले में 2 तरफ का टिकट भी कवर होता है। कुछ पॉलिसियों में चिकित्सा हालात के मद्देनजर पढ़ाई में दखल पैदा होने को भी शामिल किया जाता है। छात्र स्पॉन्सर सुरक्षा भी ले सकते हैं जो उनकी मृत्यु की स्थिति में ट्यूशन फीस का भुगतान करती है। यदि छात्र 7 दिन से ज्यादा वक्त तक अस्पताल में भर्ती रहता है तो बीमा कंपनी छात्र/पारिवारिक सदस्यों के राउंड ट्रिप इकॉनमी क्लास टिकट और विदेश में रहने का खर्च भी देती है। छात्र कवरेज पीरियड की सुविधा ले सकते हैं जो 30 दिन से लेकर अधिकतम 2 साल तक हो सकता है। इससे 30 दिन से 2 साल अधिकतम की अतिरिक्त मियाद तक भी बढ़ाया जा सकता है। छात्र को एकमुश्त प्रीमियम का भुगतान करना होता है। यदि छात्र पढ़ाई के लिए अमेरिका या कनाडा के किसी विश्वविद्यालय में जाता है तो अधिक चिकित्सा खर्च की वजह से प्रीमियम काफी ज्यादा हो सकता है। मसलन यदि आप 2 साल की किसी पॉलिसी के तहत 5,00,000 डॉलर की राशि का बीमा कराते हैं तो अमेरिका या कनाडा में इसका प्रीमियम 32,000 रुपए तक तथा दूसरे मुल्कों में 18,000 रुपए तक हो सकता
महत्वपूर्ण नुस्खा
लोन के 2 चरण होते हैं। पहला मंजूरी का चरण और दूसरा लोन मिलने का चरण। हालांकि मंजूरी मिलते वक्त लोन की मूल राशि पर गौर किया जाता है लेकिन बैंक यह कर्ज आपकी जरूरत के मुताबिक सालाना या सेमेस्टर आधार पर देता है। नंदकुमारन ने कहा , ' छात्र के आग्रह किए बिना हम लोन की राशि नहीं देते। ' यदि आपको सस्ते आधार पर आर्थिक मदद मिलती है तो लोन को एक ही सेमेस्टर पर समेट देना चाहिए। इससे लोन भुगतान का भार कुछ कम होता है। लोन के भुगतान की मियाद 5 से 7 साल तक हो सकती है। विदेश में शिक्षा से जुड़े बीमा कवर के लिए हमेशा ऐसी बीमा कंपनी की सेवा लेनी चाहिए जो वैश्विक स्तर की थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर से जुड़ी हो। इससे इलाज के खर्च की रकम लेने के लिए छात्र को भागदौड़ नहीं करनी होगी।
साभार : गिरधर.कॉम

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